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जानिए महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों का महत्व, इन स्थानों पर महादेव साक्षात् करते हैं वास

Mahadev
Mahadev

अगर किसी के अंदर इस सृष्टि की सारी खूबी है, तो वे शिव हैं. अगर आपने शिव को स्वीकार कर लिया तो आप जीवन से परे जा सकते हैं. महादेव जिनकी गोद में सृष्टि प्रलय दोनों खेलते हैं. जब वो क्रोध में आते हैं तो उनके रूद्र रूप का सामना कोई नहीं कर सकता. दूसरी तरफ वो इतने भोले हैं कि कोई प्यार से बम-बम भोले बोल कर एक लोटा जल भी चढ़ा दें तो उस भक्त की सारी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं. महादेव को आदि और अंनत माना गया है. जो पृथ्वी से लेकर आकाश और जल से लेकर अग्नि हर तत्व के अंदर विराजमान हैं.

यूं तो देश भर में लाखों शिव मंदिर और हजारों शिव धाम हैं. लेकिन 12 ज्योतिर्लिंग का सबसे खास महत्व है. इन लिंगों के दर्शन मात्र से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है, यही महादेव की विशेषता है.

आइए जानते है भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के बारे में

1.सोमनाथ ज्योतिर्लिंग-

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भारत का नहीं अपितु इस पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है. ये ज्योतिर्लिंग गुजरात के सौराष्ट्र में विराजमान हैं. इसी क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने यदुवंश का संहार कराने के बाद अपनी नर लीला समाप्त कर ली थी. वहीं शिवपुराण के अनुसार जब दक्ष प्रजापति ने चंद्रमा को क्षय रोग दिया था, तब इसी जगह पर तपस्या कर उन्होंने श्राप से मुक्ति पाई थी.

2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग-

ये ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश में कृष्ण नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है. इस ज्योतिर्लिंग का महत्व महादेव के कैलाश पर्वत जितना बताया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है.

3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग-

ये ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के उज्जैन में हैं. ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है. प्रतिदिन सुबह होने वाली भस्म आरती पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. बतादें कि महाकाल की पूजा विशेष रूप से लंबी उम्र और भारी संकटों को टालने के लिए की जाती है.

4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग-

ये ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के शहर इंदौर में स्थित है. जिस स्थान पर ये ज्योतिर्लिंग मौजूद है, उसी स्थान पर नर्मदा नदी बहती है और पहाड़ों के चारों चरण नदी बहने से यहां ऊं का आकार बनता है. वहीं इस ज्योतिर्लिंग का आकार ऊं के आकार जैसा है, तभी इसे ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है.

5.केदारनाथ ज्योतिर्लिंग-

ये ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में स्थित है. श्री केदारनाथ को केदारेश्वर भी कहा जाता है, जो केदार नामक शिखर पर विराजमान है. बाबा केदारनाथ का मंदिर बद्रीनाथ के मार्ग में स्थित है. ये स्थान भोले बाबा का अत्यंत प्रिय है. जिस तरह कैलाश का महत्व है, उसी तरह महादेव के केदार को भी दिया गया है.

6. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग-

ये ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पूणे जिले में सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है. भीमा नदी भी इसी पर्वत से निकलती है. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है. इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि जो भी व्यक्ति श्रद्धापूर्वक इस मंदिर के प्रतिदिन सुबह सूर्य निकलने के बाद दर्शन करता है. तो उसके सारे पाप नष्ट हो जाता हैं.

7. काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग-

ये ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है. ये उत्तर प्रदेश के काशी में स्थित है. कहते हैं, काशी तीनों लोकों में न्यारी नगरी है, जो भगवान शिव के त्रिशूल पर विराजती है. इस स्थान की मान्यता है कि प्रलय आने पर भी ये स्थान बना रहेगा. यहां दिन में 5 बार आरती होती है.

8. त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग –

ये ज्योतिर्लिंग गोदावरी नदी के पास महाराष्ट्र राज्य के नासिक में स्थित है. इस ज्योतिर्लिंग के पास ब्रह्मगिरि नाम का पर्वत है. इसी पर्वत से गोदावरी नदी शुरू होती है. महादेव का एक नाम त्रयंबकेश्वर भी है. इस ज्योतिर्लिंग के तीन चेहरे हैं, जिसमें ब्रम्हा, विष्णु और महेश के दर्शन किए जा सकते हैं.बतादें कि महादेव को गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के आग्रह पर यहां ज्योतिर्लिंग रूप में रहना पड़ा था.

9. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग-

श्री वैद्यनाथ धाम को बाबा धाम कहते हैं. ये ज्योतिर्लिंग झारखंड राज्य के देवघर शहर में स्थित है. ऐसा माना जाता है कि यहां माता सती का हृदय गिरा था. बताया जाता है कि रावण तप के बल से शिव को लंका ले जा रहा था. लेकिन रास्ते में व्यवधान आ जाने से शर्त के मुताबिक महादेव यहीं स्थापित हो गए.

10. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग-

ये ज्योतिर्लिंग गुजरात के बाहरी क्षेत्र में द्वारिका स्थान में स्थित है. द्वारका पुरी से नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की दूरी 17 मील की है. धर्म शास्त्रों में भगवान शिव नागों के देवता है और नागेश्वर का पूर्ण अर्थ नागों का ईश्वर होता है. भगवान शिव का एक अन्य नाम नागेश्वर भी है. वहीं इस ज्योतिर्लिंग का जिक्र शिव पुराण में भी देखने को मिलता है.

11. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग-

ये ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु राज्य के रामनाथ पुरम स्थान पर स्थित है. समुद्र तट के किनारे स्थित ये ज्योतिर्लिंग चार धामों में शुमार किया जाता है. इस ज्योतिर्लिंग की मान्यता ये है कि इसकी स्थापना खुद भगवान श्रीराम ने की थी.

12. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग-

ये ज्योतिलिंग महाराष्ट्र के संभाजीनगर के निकट दौलताबाद के पास स्थित है. अंजता-एलोरा गुफाओं के नजदीक स्थित इस मंदिर में श्रद्धालु पूरी दुनिया से आते हैं. यहां दर्शन-पूजन करने वालों का ऐसा मानना है कि यहां मांगने पर सारी मन्नतें पूरी होती हैं.

जो भी व्यक्ति प्रात: जल्दी उठकर इन 12 ज्योतिर्लिंगों का नाम या इन श्लोकों को ही जपता है, तो उसके 7 जन्मों के पाप भगवान शिव दूर करते है.

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