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महाराष्ट्र पर SC में सभी पक्षों की दलील पूरी, 7 दिसंबर तक फडणवीस साबित करें बहुमत

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महाराष्ट्र में 3 दिनों से जारी राजनीतिक उठापठक के बीच सुप्रीम कोर्ट में विपक्षी दलों (शिवसेना, एनसीपी-कांग्रेस) की याचिका पर डेढ़ घंटे सुनवाई हुई. शिवसेना की तरफ से कपिल सिब्बल, एनसीपी- कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी, देवेंद्र फडणवीस की तरफ से मुकुल रोहतगी, अजित पवार की तरफ से मनिंदर सिंह और केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट  ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. वहीं कोर्ट में सभी पक्षों की दलील पूरी हो गई, जिसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई मंगलवार सुबह 10:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी. उम्मीद की जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट कल इस पर फैसला सुना सकता है.

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बता दें कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के फैसले के खिलाफ शिवसेना, NCP और कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. रविवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी दलों को नोटिस जारी किया था. SC ने कहा था कि विधायकों और राज्यपाल की चिट्ठी देखने के बाद ही वे मामले की सुनवाई करेंगे.

SC में महाराष्ट्र संकट पर सुनवाई शुरू होते ही केंद्र की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सभी दस्तावेज पेश किए. तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राज्यपाल को दी गई चिट्ठी में NCP के 54 विधायकों के हस्ताक्षर थे. अजित पवार ने जो चिट्ठी सौंपी थी वो मराठी में है.

तुषार ने बताया कि जब अजित पवार ने चिट्ठी सौंपी थी उस वक्त वे विधायक दल के नेता थे. बहुमत मिलने के बाद ही महाराष्ट्र से राष्ट्रपति शासन हटाया गया. सुनवाई के दौरान जस्टिस रमन्ना ने कहा कि महाराष्ट्र पर आखिरी फैसला तो फ्लोर टेस्ट में ही होगा.

दूसरी ओर SC  में शिवसेना का पक्ष रखते हुए कपिल सिब्बल ने हॉर्स ट्रेडिंग पर जवाब देते हुए कहा कि अस्तबल से सिर्फ घुड़सवार ही भागा है,  घोड़े वहीं के वहीं हैं. कपिल सिब्बल ने कहा- हमारे पास 154 विधायकों के समर्थन का हवाला है. वहीं,NCP और कांग्रेस की तरफ से पेश हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या हुई है. हमारी मांग है कि 24 घंटे के अंदर फ्लोर टेस्ट कराया जाए.

बता दें कि देवेंद्र फडणवीस ने 23 नवंबर की सुबह शपथ ली थी, ऐसे में शपथ के बाद से 14 दिनों में उन्हें बहुमत साबित करने को कहा गया. यानी इस हिसाब से देवेंद्र फडणवीस के सामने 7 दिसंबर तक फ्लोर टेस्ट साबित करने की चुनौती थी.

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Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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