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बिहार-बाढ़ पीड़ितों से मिलने पहुंचे बीजेपी सांसद, नाव पलटने पर खुद डूबते-डूबते बचे

रामकृपाल यादव
रामकृपाल यादव

बिहार में बाढ़ ने तबाही मचा रखी है, सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका पटना ही है. इसी बीच पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा कर रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव डूबते-डूबते बचे. अपने फेसबुक पोस्ट लिखकर उन्होंने इस बात की जानकारी दी है.

दरअसल वो दरधा नदी  में आई बाढ़ के बाद धनरुआ के कई गांवों में बाढ़ पीड़ितों से मिलने गए थे. वे बाढ़ के हालात का जायजा लेने निकले. तभी उनके कुछ समर्थकों ने उनसे टायर की बनी एक छोटी से नाव में चलने की जिद की. पहले तो रामकृपाल यादव जाने से मना करते रहे,  लेकिन समर्थक नहीं माने तो समर्थकों की जिद के चलते वो टायर से बनी नाव पर सवार हो गए. फिर कुछ दूर जाने के बाद टायर वाली नाव पलट गई. जिससे रामकृपाल यादव नदी में गिर गए. इस हादसे के बाद वहां अफरातफरी का माहौल हो गया. किसी तरह से रामकृपाल यादव को बचाया गया. फिलहाल रामकृपाल सुरक्षित हैं.

उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन केवल पटना पर ध्यान दे रहा है. वे ग्रामीण क्षेत्रों को नहीं देख रहे हैं, लोग रो रहे हैं. उन्हें खाना नहीं मिल पा रहा है. यहां तक ​​कि मुझे एक नाव भी नहीं मिली, मुझे बाढ़ वाले इलाकों का दौरा करने के लिए एक अस्थायी नाव का उपयोग करना पड़ा.

48 घटें में हो सकती है भारी बारिश

बाढ़ से जूझ रहे बिहार के लिए अभी समस्या कम नहीं हुई है. बतादें कि अगले दो दिन फिर से परेशानी का सबब बन सकते हैं. दो दिनों की राहत के बाद राज्य में एक बार फिर मौसम का मिजाज बिगड़ हुआ है. मौसम विभाग के अनुसार राजधानी पटना समेत मध्य बिहार के कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है. तीन अक्टूबर को बिहार के दक्षिण-पश्चिमी जिलों में बारिश का अलर्ट है.

नदियां उफान पर

बारिश से पटना में जलभराव हो गया है. दूसरी ओर नदियां भी उफान पर हैं. बताया जाता है कि गंगा के साथ ही पुनपुन नदी भी उफान पर है. पुनपुन नदी का जलस्‍तर 1975 के रिकॉर्ड के बिल्‍कुल नजदीक पहुंच गया है. नदी का पानी निचले इलाकों में फैल गया है. वहीं दरधा नदी में भी उफान पर है.

सीएम नीतीश का बयान

बारीश के बिहार के लोग परेशान है, हर तरफ पानी ही पानी है. इस पर सीएम नीतीश कुमार ने बाढ़ और अधिक बारिश को जलवायु परिवर्तन माना है. उन्होंने बुधवार को कहा कि राज्य में कभी सूखा और कभी भारी बारिश जलवायु परिवर्तन के कारण है.

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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