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आस्था का महापर्व छठ, जानें शुभ मुहूर्त तिथि,पूजन विधि, होगी हर मनोकामना पूरी
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आस्था का महापर्व छठ, जानें शुभ मुहूर्त तिथि,पूजन विधि, होगी हर मनोकामना पूरी

छठ
छठ

छठ का महापर्व 31 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ शुरू हो चुका है. 4 दिनों तक सूर्य देव की आराधना किए जाने वाला ये पर्व मुख्य तौर पर बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में मनाया जाता है. छठ का आज दूसरा दिन है. दूसरे दिन खरना मनाया जाता है. खरना का अर्थ होता है, शुद्धिकरण. वहीं छठ का व्रत करने वाली महिलाएं नहाय खाय के दिन पूरा दिन व्रत रखकर केवल एक ही वक्त खाना खाती हैं. इस दिन से छठ के आखिरी दिन तक शरीर से लेकर मन तक को शुद्ध रखा जाता है.

बतादें कि खरना के दिन व्रती महिलाएं छठ मैय्या की पूजा करके उन्हें गुड़ से बनी खीर का प्रसाद चढ़ाती हैं और संध्या काल के समय घर के लोगों में इसका प्रसाद बांटा जाता है. प्रसाद खाने के बाद व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है.

 

छठ पूजा की तारीख

31 अक्टूबर 2019- नहाय-खाय

1 नवंबर 2019- लोहंडा और खरना

2 नवंबर 2019 – संध्या अर्घ्य

3 नवंबर 2019-  सूर्योदय/ ऊषा अर्घ्य और पारण

पहला अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त

छठ पूजा के दिन सूर्योदय – 2 नवंबर,  06:33 बजे

छठ पूजा के दिन सूर्यास्त – 2 नवंबर, 05:35 बजे

2 नवंबर (संध्या अर्घ्य) सूर्यास्त का समय- 17:35 बजे

3 नवंबर (उषा अर्घ्य) सूर्योदय का समय- 06:34 बजे

पूजा का विधान

– छठ पूजा में सूर्य देव की पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है

– सूरज प्रत्यक्ष रूप में दिखाई देने वाले देवता हैं जो पृथ्वी पर सभी प्राणियों के जीवन का आधार हैं

– सूर्य देव के साथ-साथ छठ पर छठी मैया की पूजा की जाती है

–  पौराणिक मान्यता के मुताबिक  छठी मैया या षष्ठी माता संतानों की रक्षा करती हैं और उन्हें लंबी उम्र प्रदान करती हैं.

– शास्त्रों में षष्ठी देवी को ब्रह्मा जी की मानस पुत्री भी कहा गया है. इन्हें मां कात्यायनी भी कहा गया है,  जिनकी पूजा नवरात्रि में षष्ठी तिथि पर होती है. षष्ठी देवी को ही

बिहार-झारखंड की स्थानीय भाषा में छठ मैया कहा गया है.

 

पूजा विधि

 – छठ पूजा से पहले सामग्री जुटा लें और फिर सूर्य देव को अर्घ्य दें.

– बांस की 3 बड़ी टोकरी, बांस या पीतल के बने 3 सूप, थाली, दूध और ग्लास, चावल, लाल सिंदूर, दीपक, नारियल, हल्दी, गन्ना, सुथनी, सब्जी और शकरकंदी, नाशपती, बड़ा नींबू, शहद, पान, साबुत सुपारी, कैराव, कपूर, चंदन और मिठाई, प्रसाद के रूप में ठेकुआ, मालपुआ, खीर-पुड़ी, सूजी का हलवा, चावल के बने लड्डू.

अर्घ्य विधि

बांस की टोकरी में सभी सामान रखें. सूर्य को अर्घ्य देते वक्त सारा प्रसाद सूप में रखें और सूप में ही दीया जलाएं. फिर नदी में उतरकर सूर्य देव को अर्घ्य दें.


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