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जेएनयू कैंपस के बाहर छात्रों का प्रदर्शन, कैंपस में मौजूद हैं उपराष्ट्रपति, जानें वजह

जेएनयू
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देश के नामी संस्थानों में शुमार जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में सोमवार को तीसरे दीक्षांत समारोह का आयोजन किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक शिरकत कर रहे हैं. मिली जानकारी के मुताबिक, तकरीबन 10 बजे उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू इसमें शामिल होने के लिए पहुंच चुके थे. जैसे ही उपराष्ट्रपति हॉल में दाखिल हुए वैसे ही बाहर छात्रों ने नारेबाजी शुरू कर दी.

 छात्रों का प्रदर्शन

बतादें कि जेएनयू के छात्र बढ़ी हुई फीस का काफी पहले से विरोध कर रहे हैं. हाल ही में जेएनयू के हॉस्टल में नया मैनुअल जारी किया गया है. इसके बाद सोमवार सुबह को छात्रों ने इसका उग्र विरोध शुरू कर दिया. विश्‍वविद्यालय परिसर में मौजूदगी में ही छात्र फीस का विरोध करते हुए पुलिस से भिड़ गए. प्रदर्शनकारी करे रहे छात्र-छात्राओं का कहना है कि बिना सस्ती पढ़ाई के जेएनयू में दीक्षांत समारोह उन्हें मंजूर नहीं है, साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती उनका प्रदर्शन जारी रहेगा.

एक साथ हुए सभी छात्र

जेएनयू छात्रसंघ की ओर से विरोध और कक्षाओं के बहिष्कार करने को कहा गया था. इससे पहले ABVP की जेएनयू इकाई ने भी प्रदर्शन किया था. मुद्दा एक था तो आपसी मतभेद भूलते हुए सभी छात्र संगठन जेएनयू प्रबंधन के खिलाफ खड़े हुए और विरोध करना शुरू कर दिया. छात्रों की इस लड़ाई में शिक्षक भी आ खड़े हुए हैं. छात्रों के मुताबिक, छात्र संगठनों के मतभेद अलग हो सकते हैं.लेकिन , मुद्दा जब आम छात्रों से जुड़ा हुआ है तो हम सब साथ हैं. क्योंकि यहां पिछड़े इलाकों और गरीब परिवारों के छात्र यहां पढ़ने आते हैं. ऐसे में खाना-पीना और रहना सब महंगा हो जाएगा. छात्र खर्च न दे पाने के चलते पढ़ाई छोड़ देंगे. छात्रों का कहना है कि जेएनयू प्रबंधन के इसी तानाशाही फैसले के विरोध में वे प्रदर्शन कर रहे हैं.

 छात्रों की मांगे

विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस लिया जाए

– छात्रों से हॉस्टल में कोई सर्विस चार्ज नहीं लिया जाए

– हॉस्टल में आने-जाने के लिए समय सीमा को खत्म किया जाए

– हॉस्टल में ड्रेस कोड नहीं लागू किया जाए

– नया हॉस्टल मैन्यू पूरी तरह रद्द किया जाए

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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