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श्मशान घाट के लिए दलितों को नहीं दिया रास्ता, ब्रिज से शव गिरा अंतिम संस्कार को मजबूर दलित

एक तरफ तो चंद्रयान-2 चांद की दूसरी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हो चुका है. लेकिन दूसरी ओर तमिलनाडु के वेल्लोर में अब भी दलितों के साथ भेदभाव का सिलसिला जारी है. आप पढ़ कर हैरान हो जाएंगे कि मंदिरों में तो उन्हें प्रवेश करने की इजाजत नहीं है. पलार नदी किनारे शवों के दाह संस्कार के लिए भी उन्हें काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. इसके लिए उन्हें ओवरब्रिज (20 फीट ऊंचे) से शव को नीचे गिराना पड़ता है. इसके बाद नीचे जाकर अंतिम संस्कार करना पड़ता है.

इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद शुरू हो गया है. जिसमें दलित समाज के लोग एक शव को ब्रिज से नीचे नदी में गिराते दिखे. नारायणपुरम दलित कॉलोनी निवासी कुप्पन (55) की सड़क हादसे में जान मौत हो गई थी. पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस ने शव को परिवार वालों को सौंप दिया. जिसके बाद उनके शव का यहां पलार नदीं किनारे दाह संस्कार के लिए लाया गया था. वहीं अंतिम संस्कार के लिए सभी जरूरी रिवाज करने के बाद लोगों ने नदी के किनारे ब्रिज से रस्सी के सहारे कुप्पन का शव लटका दिया. फिर उनका दाह संस्कार किया. वेल्लोर जिले के वानियाम्बड़ी में अगड़ी जाति के लोग रहते हैं, जहां दलितों को उनकी जमीन पर चलने की इजाजत नहीं है.

दलित कॉलोनी निवासी कृष्णन के मुताबिक, गांव के श्मशान में जगह की कमी के कारण, ग्रामीण नदी किनारे मृतकों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं. कृष्णने ने कहा कि हमें प्रवेश से वंचित किया गया है. इसलिए हम पुल से रस्सी के सहारे शव को नीचे गिरा देते हैं और फिर बाद में अंतिम संस्कार करते हैं. पिछले 4 सालों से हमने इसी तरह 4 शवों का अंतिम संस्कार किया है.

दलित हालांकि ये भी मानते हैं कि उन्हें प्रत्यक्ष रूप से कभी गांवों में जाति के आधार पर भेदभाव नहीं पाया. लेकिन वे प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हैं. दलित समाज के लोगों ने इस मामले में प्रशासन के हस्तक्षेप की मांग की है.

पुलिस ने बताया कि ये घटना 17 अगस्त की है, लेकिन बुधवार को इस घटना का वीडियो वायरल हो गया. हम मामले की जांच कर रहे है, जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे सजा दी जाएगी.

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Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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