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दशहरा जो आपके जीवन में लाएं खुशियां, बनेंगे बिगड़े काम, जानें मान्यता,महत्व-मुहूर्त

दशहरा
दशहरा

दशहरा का त्योहार अच्छाई की बुराई पर जीत के रूप में मनाया जाता है. इस दिन भगवान राम ने लंका की लड़ाई में राक्षस रावण को मारा था. इसके अलावा इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था, इसलिए भी इसे विजयदशमी के रुप में मनाया जाता है. दशहरा अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की दशमी को मनाया जाता है. विजयदशमी के दिन कोई भी अनुबंध हस्ताक्षर करना हो, गृह प्रवेश करना हो, नया व्यापार करना हो, लेनदेन का काम करना हो, तो उसके लिए ये फलदाई माना गया है.

दशहरा कब है, मुहूर्त और समय

विजय मुहूर्त: 8 अक्टूबर दोपहर-  01.42 से लेकर 02.29

दशमी तारीख की शुरुआत: दोपहर- 12:39 (7 अक्तूबर)

दशमी तारीख की समाप्ति- 14:50 (8 अक्तूबर)

दशहरे पर कैसे और किस कि करें पूजा ?

– दशहरे के दिन महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा और भगवान राम की पूजा करनी चाहिए.

– इस दिन विजय श्री प्राप्त होगी और सम्पूर्ण बाधाओं का नाश होगा.

– इस दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजा करने से उस अस्त्र से नुकसान नहीं होता

– आज के दिन मां की पूजा करके,कोई भी नया काम शुरू कर सकते हैं.

– नवग्रहों को नियंत्रित करने के लिए भी दशहरे की पूजा का महत्व है.

किस मंत्र के जप से करें विजय प्राप्त?

“श्रियं रामं , जयं रामं, द्विर्जयम राममीरयेत।

त्रयोदशाक्षरो मन्त्रः, सर्वसिद्धिकरः स्थितः।।”

नवरात्रि समाप्त होने के बाद मनाएं दशहरा

– दोपहर के बाद पहले मां भगवती देवी की फिर प्रभु श्रीराम की पूजा करें.

– देवी और श्री राम के मंत्रों का जाप करें.

– अगर आप ने कलश की स्थापना की है तो आप नारियल हटा सकते हैं और उसको प्रसाद रूप में ग्रहण करें.

– उस कलश का जल पूरे घर में छिड़क दें जिससे नकारात्मक शक्ति खत्म हो जाए.

 कैसे करें धन की प्राप्ति

– इस दिन शमी का पौधा लगाएं

– रोजाना उसमे पानी डालते रहें

– पौधे के निकट हर शनिवार को शाम के वक्त दीया जलाएं

– ऐसा करने से आपको धन का अभाव कभी नहीं होगा

क्यों खाते हैं जलेबी

दशहरे के दिन जलेबी खाने की परंपरा सदियों पुरानी है. इस प्रचलन की शुरुआत काफी पहले से है. पुरानी कथाओं की मानें तो भगवान राम को शश्कुली नाम की मिठाई काफी पसंद थी. वक्त के साथ इस मिठाई का नाम बदला और आज इसे जलेबी के नाम से जाना जाता है. रावण दहन के बाद इसलिए आज भी लोग जलेबी खाते हैं और बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते हैं.

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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