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Culture Observed

पूरे देश में हर्षोल्लास से मनाया गया, ईद-उल-अजहा का त्योहार

पूरे देश में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. साल में दो बार ईद मनाई जाती है. एक ईद-उल-फितर और दूसरी ईद-उल-जुहा यानि बकरीद. इस्लामिक मान्यता के अनुसार उल-जुहा हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है. इस पाक मौके पर कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक की सभी मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा की गई.

 

साथ ही  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पीएम मोदी, कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने देशवासियों को ईद-उल-अजहा की शुभकामनाएं दी.

 

इस्लाम के मुताबिक बकरीद पर मुस्लिम लोग बकरे की कुर्बानी देते हैं. बकरीद, मीठी ईद के 70 दिन बाद मनाई जाती है. वहीं दोनों ही ईद मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी धूमधाम से मनाते हैं. बकरीद के दिन जानवर की कुर्बानी दी जाती है. कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है, एक कुर्बानी करने वाला अपने घर पर रख लेता है. दो हिस्सों को रिश्तेदारों और पड़ासियों में बांट दिया जाता हैं.

ईद के दिन सभी लोग बधाई देने के लिए अपने सगं-संबंधियों से मिलने के लिए उनके घर पर जाते हैं. बकरीद के दिन सुबह नहाकर, नए कपड़े पहन कर मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज पढ़ने मस्जिद जाते हैं. उसके बाद सभी लोग एक दूसरे के गले लगकर ईद की बधाई देते हैं. इस्लाम में कहा गया है कि त्योहार को मनाते वक्त ये ध्यान रखना जरूरी है कि आपके पड़ोसी के घर में भी वे त्योहार इतनी खुशी के साथ मन रहा हो.

आपको एक बात और बतादें कि इस्लाम धर्म में बकरीद या बकरा ईद जैसा कोई शब्द है ही नहीं.  ये नाम भारत में ही चलन में है. क्योंकि बकरीद के दिन ज्यादातर मुस्लिम बकरे की कुर्बानी देते हैं. इसलिए इसे बकरा ईद कहते हैं.

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