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गणेश चतुर्थी पर घर लाएं गणपति बप्पा, ऐसे करें पूजा, ये है शुभ मुहूर्त

वक्रतुंड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ।।

निर्विघ्नं कुरु मे दे सर्व कार्येषु सर्वदा।।

शास्त्रों के अनुसार हिंदू धर्म में सबसे पहला स्थान श्री गणेश जी भगवान को दिया गया है. किसी भी शुभ काम को करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है. गणेश जी के बिना कोई भी पूजा प्रारंभ  नहीं हो सकती. हिंदू धर्म में 5 देवी देवता यानि सूर्य, विष्णु, शिव, दुर्गा, गणेश जी प्रमुख देवता है.

अगर आप कई समस्याओं से परेशान हैं, तो इस गणेश चतुर्थी को आपके सारे कष्ट दूर हो जाएंगे. गणेश चतुर्थी इस बार 2 सितम्बर को मनाई जाएगी. शास्त्रों में वैसे तो हर महीने चतुर्थी को गणेश जी की पूजा का विधान है, लेकिन भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को देश भर में धूमधाम के साथ मनाया जाता है. घर-घर में गणेशजी की स्थापना की जाती है. गणेश चतुर्थी का त्योहार गणपति के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. महाराष्ट्र में लोग इस सामूहिक रूप से बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं.

गणेश चतुर्थी के अवसर पर भक्त अपने घरों में गणपति को विराजमान करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार कुछ दिन बाद विसर्जन करते हैं.

गणेश चतुर्थी (भाद्रपद शुक्ल पक्ष के चतुर्थी) 2 सितंबर 2019 दिन सोमवार

गणेश चतुर्थी तिथि आरंभ- 4:46 चतुर्थी तिथि समाप्त- 01:53 (3 सितंबर 2019)

पूजा मुहूर्त

2 सितम्बर 11:05 से 13:36 दोपहर तक प्रारंभ कर लेना चाहिए.

 विशेष मुहूर्त  

अमृत चैघड़िया- सुबह 6.10 से 7.44 तक

शुभ चैघड़िया- सुबह 9.18 से 10.53 तक

लाभ चैघड़िया- दोपहर बाद 3.35 से 5.09 तक

 

गणेण भगवान की पूजा कैसे करें

गणेश स्थापना से पहले पूजा की सारी सामग्री इकट्ठा कर लें. पूजा के लिए चौकी, लाल कपड़ा, गणेश प्रतिमा, जल कलश, पंचामृत, लाल कपड़ा, रोली, अक्षत, कलावा जनेऊ, गंगाजल, सुपारी, इलाची, नारियल, चांदी का वर्क,लौंग पंचमेवा, घी कपूर आदि एकत्र कर लें.

गणेश जी की स्थापना

-सुबह नहा-धो कर लाल वस्त्र धारण करें.

-सही दिशा का चुनाव करके चौकी स्थापित करें.

-भगवान गणेश की स्थापना से पहले उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं.

-फिर गंगाजल से स्नान कराएं और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर प्रतिमा स्थापित कर दें.

गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक जब तक गणपति महाराज घर में रहते हैं तब तक उनका एक परिवार की सदस्य की तरह ध्यान रखा जाता है. गणपति जी को 3 बार भोग लगाना अनिवार्य है. वैसे गणेश भगवान को मोदक का भोग लगाना चाहिए.

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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