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मिल गया विक्रम लैंडर, 3 टुकड़ों में चांद पर बिखरा मिला, इस भारतीय ने ढूंढा

विक्रम
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)  के महात्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2  के  विक्रम लैंडर का मलबा आखिरकार मिल गया है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर के बारे में ट्वीट कर जानकारी दी है कि उसके लूनर रिकनैसैंस ऑर्बिटर (LRO) ने चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर का पता लगा लिया है. वहीं नासा ने विक्रम का मलबा ढूंढने का क्रेडिट चेन्नई के एक मैकेनिकल इंजीनियर शनमुगा सुब्रमण्यन को दिया है. शनमुगा सुब्रमण्यन ने इसरो के मिशन चंद्रयान-2 को सफल बताया है.

बतादें कि नासा ने अपने बयान में कहा,  ’26 सितंबर को क्रैश साइट की एक तस्‍वीर जारी की गई थी और विक्रम लैंडर के सिग्नल्स की खोज करने के लिए लोगों को बुलाया गया था. ‘ नासा ने आगे बताया, ‘चेन्नई के 33 साल मैकेनिकल इंजीनियर शनमुगा सुब्रमण्यन ही पहले वो शख्स हैं, जिन्होंने मलबे की पहचान की.’

नासा के दावे के अनुसार चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का मलबा उसके क्रैश साइट से 750 मीटर दूर जाकर मिला. वहीं मलबे के तीन सबसे बड़े टुकड़े 2×2 पिक्सल के हैं. नासा  ने सोमवार की रात करीब 1:30 बजे विक्रम लैंडर के इम्पैक्ट साइट की तस्वीर जारी की और बताया कि उसके ऑर्बिटर को विक्रम लैंडर के तीन टुकड़े दिखे हैं. NASA के अनुसार,  विक्रम लैंडर की तस्वीर 1 किलोमीटर की दूरी से ली गई है.

इस फोटों में चंद्रमा की मिट्टी पर प्रभाव भी देखा गया है, फोटो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि चांद की सतह पर जहां विक्रम लैंडर गिरा,  वहां की मिट्टी को नुकसान भी हुआ है. इसरो ने नासा से संपर्क साधा है और विक्रम लैंडर के इम्पैक्ट साइट की जानकारी मांगी है. मिली जानकारी के मुताबिक, नासा इसरो को एक पूरी रिपोर्ट सौंपेगा, जिसमें विक्रम लैंडर के बारे में ज्यादा जानकारी मिल सकेगी.

ऐसे ढूंढा विक्रम का मलबा

शनमुगा सुब्रमण्यन ने बताया कि ‘नासा ने 14 -15 अक्टूबर और 11 नवंबर को 2 तस्वीरें जारी की थीं. मैं अपने दोनों लैपटॉप पर 2 तस्वीरों की मिलाकर साथ में तुलना कर रहा था. एक तरफ विक्रम लैंडर की पुरानी तस्वीर थी,  दूसरी ओर नई फोटो थी, जो नासा ने जारी की थी. मुझे ट्विटर और रेडिट यूजर्स से काफी मदद मिली. 4-5 दिन तक करीब 7-8 घंटे में इस काम में देता था.’

उसने आगे कहा,  ‘ये बहुत मुश्किल था लेकिन मैं ट्राई करता रहा. नतीजे पर पहुंचने के बाद मैंने 3 अक्टूबर को ट्विटर पर इसका ऐलान किया.’लेकिन जानकारी सार्वजनिक करने से पहले नासा 100 फीसदी आश्वस्त होना चाहता था. इसलिए ये जानकारी देने से पहले इंतजार किया गया. जिसके बाद नासा ने खुद फैक्ट चेकिंग की. पूरी तरह से जांच और आश्वस्त होने के बाद 3 दिसंबर को नासा ने ट्वीट करके विक्रम लैंडर का मलबा मिलने की जानकारी दी. साथ ही शनमुगा सुब्रमण्यन को इसका क्रेडिट भी दिया.

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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