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राम रहीम से मिलने को बेताब हनीप्रीत, जेल से बाहर आते ही पहले बार डेरे में दिखी

हनीप्रीत
हनीप्रीत

जेल से जमानत पर छूटने के बाद राम रहीम की मुंह बोली बेटी हनीप्रीत पहली बार दिखाई दीं, मौका था सिरसा में डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक बाबा शाह मस्ताना बलुचिस्तानी के 128वें जन्मदिवस का. मस्ताना जी के जन्मदिवस को लेकर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. इस दौरान हनीप्रीत भी पहली बार सामने आई है.

बतादें कि जेल से बाहर आने के बाद हनीप्रीत पहली बार लोगों के सामने आई. उसके साथ राम रहीम का पूरा परिवार भी था. वहीं एक साथ आकर ये  मैसेज देने की कोशिश की गई कि राम रहीम के परिवार और उनके बीच में कोई दूरी नहीं है, क्योंकि जब से हनीप्रीत बाहर आई है,  तभी से राम रहीम के परिवार के साथ उसकी अनबन की खबरें चर्चा में थीं. इस कार्यक्रम में राम रहीम की पत्नी, बेटे, बेटियां और बेटों की पत्नियां और दामाद भी मौजूद थे.

कार्यक्रम के दौरान राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत सत्संग सुनती रही, कुछ देर हाथ जोड़े खड़ी भी रही. पंचकूला हिंसा के 38 दिन बाद हनीप्रीत को गिरफ्तार कर लिया गया था. उसके बाद से वो अम्बाला की सेंट्रल जेल में बंद थी. 6 नवंबर को ही जेल से छूटी है.

हनीप्रीत ने राम रहीम से मिलने के लिए पूरी ताकत लगा दी. वहीं रोहतक की सुनारिया जेल में कैदियों से मिलने के दो दिन सोमवार और गुरुवार तय किए गए हैं. इन दोनों दिनों में उसने अपने पिता से मिलने की लगातार कोशिश की, लेकिन जेल अधिकारियों ने उसे राम रहीम से मिलने नहीं दिया.

ये था मामला

याद हो तो 25 अगस्त 2017 को डेरा सचा सौदा प्रमुख राम रहीम को साध्वी यौन शोषण मामले में दोषी करार दिया गया था. जिसके बाद हरियाणा के पंचकूला और सिरसा के अलावा पंजाब के कई हिस्सों में आगजनी और दंगे हुए थे, जिसमे 40 लोगों की मौत भी हुई थी. साथ ही पुलिस ने डेरा प्रमुख की मुंह बोली बेटी हनीप्रीत, डेरा के प्रवक्ता आदित्य इन्सां सहित कुल 1000 लोगों के खिलाफ 177 FIR दर्ज की थी. हनीप्रीत ने सितम्बर 2017 में पुलिस के सामने आत्मसमपर्ण कर दिया था. इसके बाद से ही हनीप्रीत जेल में थी.

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Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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