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सरदार पटेल के पास होता कश्मीर मसला तो चुटकियों में निकलता समाधान-पीएम मोदी

सरदार
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सरदार वल्लभ भाई पटेल की 144वीं जयंती पर देश उन्हें याद कर रहा है. उनकी जयंती को देश में राष्ट्रीय एकता और अखंडता दिवस के तौर पर मनाया जा रहा है. वहीं वल्लभभाई पटेल की जयंती के मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया. बतादें कि प्रधानमंत्री केवडिया में थे, जहां उन्होंने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर श्रद्धांजलि दी. इस मौके पर प्रधानमंत्री ने देश की एकता, विविधता, कई भाषा, बोली का जिक्र किया और कहा कि यही देश की शान है.

रन फॉर यूनिटी एकता का प्रतीक

2014 से हर साल 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है.  इस दिन हर वर्ग के लोग ‘रन फॉर यूनिटी’ (एकता दौड़) में भाग लेते हैं.  अक्टूबर महीने के अपने ‘मन की बात’ रेडियो संबोधन में पीएम मोदी ने लोगों से ‘रन फॉर यूनिटी’ में बड़ी संख्या में भाग लेने के लिए कहा था. पीएम ने कहा था कि रन फॉर यूनिटी एकता का प्रतीक है जो ये दिखाता है कि देश एक दिशा में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के लक्ष्य के साथ सामूहिक रूप से आगे बढ़ रहा है.

सरदार पटेल चुटकी में सुलझा लेते कश्मीर मसला

पीएम मोदी ने कहा कि अनुच्छेद 370 ने एक अस्थाई दीवार बना रखी थी,  जिसने कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा दिया. प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि आज सरदार साहब को मैं हिसाब दे रहा हूं, सरदार साहब आपका जो सपना अधूरा था वो दीवार ढहा दी गई है. उन्होंने कहा कि कभी सरदार पटेल ने कहा था कि अगर कश्मीर का मसला उनके पास होता तो उसे सुलझने में देर नहीं लगती.

500 रियासतों का विलय

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, ‘सरदार पटेल के विचारों में देश की एकता को हर व्यक्ति महसूस कर सकता है. आज हम उनकी आवाज़ को सबसे बड़ी प्रतिमा के नीचे सुन रहे हैं. यहां आकर मुझे काफी शांति मिली है.’ सरदार पटेल ने 500 रियासतों को एक करने का काम किया.

प्रतिमा पूरे विश्व में प्रसिद्ध

पीएम मोदी ने कहा, ‘किसानों से मिले लोहे,  क्षेत्रों की मिट्टी से इतनी बड़ी प्रतिमा का निर्माण हुआ है. ये मूर्ति विविधता में एकता की जीवन प्रतीक है. ठीक एक साल पहले दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा का देश को समर्पित किया गया था, आज ये प्रतिमा पूरे विश्व को आकर्षित कर रही है.’

बिना नाम लिए पाक पर निशाना

 प्रधानमंत्री ने कहा कि जो हमसे युद्ध नहीं लड़ सकते हैं वो हमारी एकता को चुनौती दे रहे हैं. लेकिन कुछ बात तो है जिसकी वजह से हमारी हस्ती नहीं मिटती है. वो इस मौके पर देश को आशवस्त करना चाहते हैं कि हम देश की प्रगति के लिए आने वाली सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं.

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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