Gathered Humour

अगर आप हैं चाय लवर तो जरूर पढ़ें, सुबह हो या शाम बिना चाय नहीं होता काम

चाय
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चाय, चाय, चाय…हर तरफ चाय सुबह उठो तो चाय, रेल में सो रहे हो तो चाय, ऑफिस जाओ तो पीकर जाओ चाय और वहां पहुंच कर फिर से पीओ चाय. ऐसा लगता है कि यार…ये चाय नहीं होती तो हमारा क्या होता, कौन हमारा अकेलापन दूर करता, चाय से मानो मोहब्बत सी हो गई है.आप चाय को लेकर प्यार का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि चाय का कप मेरे हाथ में है, उसकी चुस्की लेकर मैं ये आर्टिकल लिख रहा हूं. तो एक काम ये भी हो सकता है कि आप मेरी तरह चाय के दीवाने हैं तो आप भी आर्टिकल चाय पीते-पीते पढ़ेंगे तो आपको ज्यादा मजा आएगा. वहीं भारत को अगर चाय प्रधान देश कहा जाए, तो कोई हैरानी वाली बात नहीं होगी.

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भारत के चाय प्रेमी

हमारे देश में लोग बाथरूम ही चाय पीकर जाते है, उनमें से कई लोग ऐसे हैं, जो एक दिन में कई- कई कप चाय पी जाते हैं. फिर भी कहते है, एक कप चाय और हो जाती तो मजा आ जाता, इस वाली में पत्ती कम थी. जो लोग आपको जानते हैं, वे अक्सर आपको टोकते भी होंगे कि यार तुम इतनी चाय पीते क्यों हो.  लेकिन एक सच्चा चाय प्रेमी ही बता सकता है, कि चाय उसका प्यार है. कोई उसको उससे जुदा नहीं कर सकता. क्योंकि चाय की एक चुस्की उसे तरोताजा कर देती है.

चाय
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रेल की चाय

भारत में सबसे ज्यादा लोग रेल से यात्रा करते है, रेल में यात्रा के दौरान स्टेशन पर गाड़ी रुकती है, और आपके कानों में एक ही आवाज सुनाई देती होगी. वो है सिर्फ चाय..चाय..चाय…ऐसे में चाय लवर चाय नहीं छोड़ता.

चाय एक क्रांति

ऊपर तो आपने चाय की दीवानगी देख ली, हमने आपको बताया कि चाय लवर कौन होता है. वहीं अगर आपसे कहा जाए कि आपको चाय छोड़नी पड़ेगी, तो आप क्या करेंगे, शायद झंडा लेकर सड़कों पर उतरेंगे, नारेबाजी करेंगे. कुछ तो करेंगे लेकिन चाय नहीं छोड़ेंगे. चाय एक नशा है, जिसने किया सिर्फ उसको पता है. तो कुछ भी हो जाए हम चाय नहीं छोड़ेंगे.

चाय का इतिहास

चाय के बारे में इतना कुछ बता दिया अगर ये नहीं बताया कि इसकी शुरुआत कहां से हुई थी, तो फायदा क्या.  कहते हैं कि एक चीनी भिक्षु ने अपनी तपस्या के दौरान थकावट महसूस होने पर जब गर्म पानी पिया तो उसे एकाएक स्फूर्ति का अहसास हुआ. बाद में देखा गया कि जिस बर्तन में पानी गर्म हो रहा था,  उसमें साथ लगे पेड़ की पत्तियां गिर गई थीं और ये पेड़ चाय का था.

चाय के खिलाफ आंदोलन

1773ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी को वित्तीय संकट से उबारने के लिए ब्रिटेन के तत्कालीन पीएम लॉर्ड नार्थ ने ये कानून बनाया कि ईस्ट इंडिया कंपनी सीधे ही अमेरिका में चाय बेच सकती है. कंपनी के जहाजों को इग्लैंड के बंदरगाहों पर आने और चुंगी देने की जरूरत नहीं थी. अमरीकी उपनिवेश में इस चाय नीति का जमकर विरोध हुआ और कहा गया कि ”सस्ती चाय” के माध्यम से इंग्लैंड बाहरी कर लगाने के अपने अधिकार को बनाए रखना चाहता था. इसके बाद पूरे देश में चाय योजना के खिलाफ आंदोलन चला. इसका नतीजा ये निकला कि आंदोलन इतना हिंसक होगया कि लोगों ने कई करोड़ की चायपत्ती को समुद्र में गिरा दिया.

ऐसे बनाए चाय

एक तो होता है, चाय बनाना फुल देसी स्टाइल पानी लिया, दूध चाय पत्ती चीनी डाली, उबाल दिया. एक होता है, इनको तरीके से अच्छे से उबालकर पकाकर चाय बनाना, तो चाय बनाते वक्त ये चीजें ध्यान रखें.

चाय के लिए होगा तीसरा विश्व युद्ध

अंग्रेज़ों को चाय बहुत पसंद है. कहते हैं कि हर साल ब्रिटेन के लोग क़रीब 60 अरब कप चाय पी जाते हैं. इसका औसत बैठता है 900 कप चाय सालाना. ये औसत बड़े-बूढ़ों और बच्चों सबको मिलाकर होता है. भारत में तो चाय न मिले लोगों को तो उनके सिर में दर्द हो जाता है. ऐसे में अगर इतने लोगों की चाय पर कहीं से रोक लगाने की बात भी उठी तो तलवारें चल जाएगी.

चाय दिमाग के लिए लाभदायक

– जो लोग चाय नहीं पीते उनकी तुलना में पीने वालों का दिमाग ज्यादा बेहतर तरीके से काम करता है.

– चाय पीने से दिमाग किसी भी चीज को आसानी से समझ लेता है.

– चाय रोजाना पीना दिमागी तंत्र के लिए भी अच्छा है.

– बढ़ती उम्र के साथ दिमाग के ताने-बाने में आने वाली कम को भी रोकता है.

चाय को लेकर रिसर्च में खुलासा

शोधकर्ताओं ने कहा कि चाय पीना इंसान की सेहत के लिए लाभकारी है. इसके सकारात्मक प्रभावों में मिजाज में सुधार होना और हृदय और नसों संबंधी बीमारी से बचाना शामिल है. ये अध्ययन 2015 से लेकर 2018 के बीच 60 साल और उससे अधिक उम्र वाले 36 बुजुर्गों पर किया गया जिसमें उनकी सेहत, जीवनशैली और मनोवैज्ञानिक सेहत संबंधी डेटा जुटाया गया.

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को पनपने का मौका देता हूं..

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