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लड़कियां शादी से पहले क्या सोचती है, ये बात लड़कों के लिए जानना बेहद जरूरी

लड़कियां
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शादी हर किसी की जिंदगी का अहम फैसला होता है. आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी कि शादी का लड्डू जो खाए पछताए जो न खाए वो पछताए. लेकिन सबसे जरूरी होती है, किसी लड़की का अपना घर बार छोड़कर किसी ओर के परिवार में जाकर एडजस्ट करना. ऐसे में चाहे वो लव मैरिज  करें या अरेंज, दोनों ही हालातों में उनके में हजारों सवाल होते हैं जो लड़कियों को परेशान करते हैं. दूसरी ओर लड़को को लगता है कि हमारी तरह वो भी बस हनीमन के बारे में सोचती होंगी तो आप गलत हैं. आइए आज हम आपको बताएंगे कि रिश्ता तय होने से लेकर शादी की रात तक लड़कियां क्या सोचती है.

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ससुराल वाले अपनाएंगे या नहीं             

शादी के बाद लड़का अपना घर छोड़कर नहीं आता, बल्कि लड़की अपना घर छोड़ के आती है. उसके लिए एक अलग सी दुनिया होती है. जहां सब कुछ नया होता है. तभी लड़कियों के दिमाग में शादी से एक रात पहले तक यहीं चल रहा होता है कि क्या मेरे ससुराल वालें मुझे मेरे माता पिता की तरह प्यार से रखेंगे की नहीं. क्या वो वाकई मुझे दिल से अपनाएंगे. लड़कियां सबसे ज्यादा अपने दिल की बात अपनी मां से करती है, इसलिए भी उनके मन में सबसे ज्यादा सवाल अपने होने वाली सास के स्वभाव को लेकर रहता हैं कि वे उसे बेहतर तरीके से समझ पाएंगी या नहीं.

जीवन साथी का चुनाव

लड़कियां शादी से पहले ये जरूर सोचती है कि हमारा सोने वाला पति क्या हमारा जीवन भर साथ निभाएगा. क्या मेरे जीवन साथी का चुनाव ठीक है, क्या वो मुझे बीच सफ़र में अकेला तो नहीं छोड़ जाएगा.

विवाह में होने वाले खर्चे पर चर्चे

लड़कियों की शादी में खर्चा ज्यादा होता ही है. ऐसे में हर लड़की के दिमाग में आता है कि मेरी शादी में घर वालों का खर्चा ज्यादा तो नहीं करवा दिया. कहीं मेरी शादी मेरे पापा पर बोझ तो नहीं बन रही.

 शादी को लेकर कहीं जल्दबाजी तो नहीं

अक्सर सभी लोग ये सोचते है कि लड़कियां भी उनकी तरह शादी से पहले सिर्फ पार्टनर और हनीमून डेस्टिनेशन को लेकर सोचती होंगी. लेकिन उन्हें नहीं पता कि हर लड़की के मन में शादी को लेकर कुछ अरमान होते हैं. शादी से एक रात पहले लड़की को ये डर सताता है कि कहीं वे शादी को लेकर जल्दी तो नहीं कर रही हैं. क्या वे शादी की जिम्मेदारी को संभालने लायक हो गई है.

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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