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ऐसे रखें करवा चौथ का व्रत, जानिए इसका महत्व, नियम और मुहूर्त

करवा चौथ
करवा चौथ

करवा चौथ व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पड़ता है. ये व्रत महिलाएं पति की लंबी उम्र और अपने सुहाग की रक्षा के उद्देश्य से करती हैं. इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत कर कथा सुनकर रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती है. करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के अलावा कई कुंवारी लड़कियां भी रखती हैं. इस दिन भगवान गणेश, मां गौरी और चंद्रमा की उपासना होती है. चंद्रमा को आमतौर पर आयु, सुख और शांति का कारक माना जाता है.

करवा चौथ व्रत कैसे रखें

– सुबह जल्दी उठकर 06:23 बजे से रात 08:16 बजे तक व्रत रखें.

– करवा चौथ की पूजा 05:50 बजे से 07:05 बजे के बीच में होगी.

– रात 08:16 बजे के करीब च्रंदमा दिखेगा.

-चंद्रमा को जल देने के बाद महादेव की पूजा करें.

– कम से कम 11 बार ऊं नम: शिवाय का जाप करें.

– 11 बार पार्वति नम: का जाप करें.

-भगवान गणेश और कार्तिकेय की भी पूजा करें.

-पूजा के बाद व्रत पूरा करें.

-अपने जीवनसाथी के हाथ से जल ग्रहण करें

करवा चौथ व्रत के नियम  

– इस व्रत को केवल सुहागिनें या फिर जिनका रिश्ता तय हो गया, वही स्त्रियां रख सकती हैं.

– ये उपवास निर्जल ही रखना चाहिए.

– व्रत रखने महिलाएं ध्यान रखें, इसदिन काली या सफेद वस्त्र बिल्कुल न पहनें.

– करवा चौथ के व्रत में लाल वस्त्र को सबसे उत्तम माना गया है, वहीं पीला वस्त्र भी पहना जा सकता है.

– इस दिन महिलाओं को पूरे 16 श्रृंगार करने चाहिए.

– कोई महिला अगर बीमार है तो उसकी जगह उसका पति ये व्रत कर सकता है.

– इस व्रत की कथा को पूरे मन से सुनना चाहिए और कथा के बीच में दूसरे से बातें नहीं करनी चाहिए.

– जो महिला पूरे नियम के साथ ये व्रत रखती है, इससे उसका सौंदर्य बढ़ता है.

-करवा चौथ के दिन भूलकर भी पति से लड़ना नहीं चाहिए.

व्रत का महत्व

करवा  चौथ की सबसे पहले शुरुआत प्राचीन काल में सावित्री की पतिव्रता धर्म से हुई. सावित्री ने अपने मृत्यु हो जाने पर भी यमराज को उन्हें अपने साथ नहीं ले जाने दिया और अपनी दृढ़ प्रतिज्ञा से पति को फिर से प्राप्त किया. वहीं दूसरी कहानी द्रौपदी की है. वनवास काल के दौरान जब अर्जुन तपस्या करने नीलगिरि पर्वत गए थे, तब द्रौपदी ने अर्जुन की जान बचाने के लिए अपने भाई भगवान श्री कृष्ण से मदद मांगी. तब भगवान कृष्ण ने उन्हें वैसा ही उपवास रखने के लिए कहा जैसा माता पार्वती ने भगवान शिव की रक्षा के लिए रखा था.

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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