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अब चलेगा ‘दादा-राज’! सौरव गांगुली होंगे बीसीसीआई के अगले अध्यक्ष

सौरव गांगुली
सौरव गांगुली

भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे सफल कप्तानों में से एक रहे सौरव गांगुली 23 अक्टूबर को बीसीसीआई के नए अध्यक्ष  बन जाएंगे. उनका कार्यकाल 10 महीने का होगा. दादा नाम से मशहूर सौरव गांगुली को हमेशा से भारतीय क्रिकेट के संकटमोचक के तौर पर जाना जाता रहा है. जब वे टीम के कप्तान बने तब भारतीय टीम अनुभवी खिलाड़ियों के संन्यास लेने के बाद बदलाव के दौर से गुजर रही थी और अब बीसीसीआई के अध्यक्ष बन रहे हैं तो भी बोर्ड की छवि बहुत अच्छी नहीं है. ऐसे में गांगुली से बेहद उम्मीदें हैं कि वे बीसीसीआई की मजबूत छवि को फिर से पेश करेंगे और कई कड़े और अहम कदम उठाएंगे. वैसे सौरव गांगुली के खिलाफ अध्यक्ष पद के लिए कोई और नामांकन नहीं है और इसलिए तकनीकी लिहाज से गांगुली का बोर्ड का अध्यक्ष बनना तय है. दूसरी ओर गृह मंत्री के बेटे जय शाह को सचिव पद के लिए चुना जा सकता है.

सौरव का नामांकन

क्रिकेट असोसिएशन ऑफ बंगाल (सीएबी) के मौजूदा अध्यक्ष गांगुली के नामांकन के दौरान श्रीनिवासन, राजीव शुक्ला और निरंजन शाह मौजूद थे. ऐसा पहली बार देखने को मिला जब बोर्ड के पुराने प्रशासक किसी एक उम्मीदवार के लिए साथ आए.

बतादें कि BCCI अध्यक्ष पद की रेस में सौरव गांगुली ने बृजेश पटेल को पछाड़ा है. क्योंकि बृजेश को एन श्रीनिवासन के समर्थन की वजह से अध्यक्ष पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन गांगुली के नाम पर सहमति के बाद उनकी दावेदारी खत्म हो गई. मंगलवार को गांगुली ने उन सभी भावी अधिकारियों के साथ एक फोटो शेयर की जो उनकी टीम का हिस्सा होंगे. वहीं गांगुली के साथ इस फोटो में जय शाह, जयेश जॉर्ज, बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर, अरुण धूमल और महिम वर्मा हैं. साथ ही उन्होंने इस फोटो पर लिखा, ‘बीसीसीआई में नई टीम… उम्मीद है कि हम साथ मिलकर अच्छा काम कर सकेंगे. अनुराग ठाकुर शुक्रिया इसके लिए.’

सौरव गांगुली फिलहाल कॉमेंट्री भी करते हैं और कमर्शियल विज्ञापनों से भी जुड़े हैं. इसी के चलते उन्हें बीसीसीआई अध्यक्ष बनने से काफी बड़ी रकम का नुकसान होगा. क्योंकि पद पर रहते हुए कहीं और से इनकम करने से हितों के टकराव का मामला आएगा.

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Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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