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लद्दाख के युवा सांसद के भाषण से गूंज उठी संसद, मोदी और शाह ने भी की तारीफ़

6 अगस्त का दिन था. लोकसभा में  धारा 370 पर बहस चल रही थी. सभी सांसद बैठे हुए थे. सभी अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, और बारी-बारी से अपनी बात रख रहे थे. फिर बारी आई लद्दाख के सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल की ये वो नाम है जिसकी चर्चा मंगलवार को संसद से लेकर आज सोशल में हो रही है. नामग्याल ने अपने शानदार भाषण से सबका दिल जीत लिया. सदन में खूब तालियां बजी. हर कोई उनके भाषण की तारीफ कर रहा है. नामग्याल लद्दाख से बीजेपी के सांसद हैं. 34 साल के युवा सांसद भौगोलिक आधार पर भारत के सबसे बड़े लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधितत्व करते हैं.

 

हर कोई मुरीद

पहली बार संसद में पहुंचे जामयांग सेरिंग नामग्याल ने अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर विधेयक पर चर्चा के दौरान इस अंदाज में अपनी बात रखी कि संसद तालियों से गूंज उठी. वो एक सांस में अपनी बात कह रहे थे, ओर सांसद उनकी हर बात पर टेबल बजा रहे थे. उनके इस अंदाज के गृह मंत्री अमित शाह और पीएम मोदी भी मुरीद हो गए.

पीएम मोदी ने ट्वीट में लद्दाख के बीजेपी सांसद नामग्याल को शाबासी देते हुए कहा कि उन्होंने अपने भाषण में क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं को पेश किया है. मेरे युवा दोस्त, लद्दाख से सांसद जामयांग शेरिंग नामग्याल ने जम्मू-कश्मीर पर महत्वपूर्ण विधयकों पर चर्चा के दौरान शानदार भाषण दिया. लद्दाख के हमारे भाईयों और बहनों की आंकाक्षा को सुसंगत रूप से प्रस्तुत किया. इसे अवश्य सुना जाना चाहिए.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी नामग्याल के भाषण का वीडियो ट्वीट किया. उन्होंने उसे देखने की अपील की.

राजनीतिक सफर

जामयांग शेरिंग ने संसद तक के सफर में लंबा रास्ता तय किया है. राजनीति के अखाड़े में उतरने से पहले उन्होंने अपना पहला कदम जम्मू में रखा. वे ऑल लद्दाख स्टूडेंट एसोसिएशन के नेता थे. बाद में वे लद्दाख में बीजेपी के युवा मोर्चे से जुड़ गए. जम्मू से ग्रेजुएशन करने के बाद वे लद्दाख में बीजेपी के दफ्तर में काम करने लगे. यहां उनका काम पार्टी के अलग-अलग नेताओं के लिए चिट्ठियां लिखना था. राजनीति में उन्हें सबसे बड़ा मुकाम जब हासिल हुआ. जब वो लद्दाख के पूर्व एमपी थुपस्तान छेवांग के चुनावी प्रचार के दौरान मीडिया सेकरेट्री बनाए गए थे. उसके बाद वो लद्दाख में कॉउंसिलर बने. फिर वो यहां चेयरपर्सन बने और बाद में उन्हें बीजेपी ने जिले का प्रभारी बनाया.

जामयांग के बारे में

जामयांग सेरिंग नामग्याल का जन्म 4 अगस्त 1985 को लद्दाख के माथो गांव में हुआ था. जामयांग का परिवार बुद्धिज्म को मानता है. उनके पिता का नाम स्टैनजिन दोर्जी और मां का नाम ईशे पुतित है. जामयांग जम्मू में उस वक्त चर्चा में आए थे, जब वो जम्मू यूनिवर्सिटी के कामयाब छात्र नेता बने थे.

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Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को पनपने का मौका देता हूं..