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सड़क पर इंसाफ की गुहार लगाती पुलिस, हेडक्वार्टर के बाहर काली पट्टी बांध प्रदर्शन

दिल्ली
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दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट के बाहर हुई पुलिस और वकीलों के बीच भिड़ंत का मामला बढ़ता जा रहा है. मंगलवार सुबह दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर भारी संख्या में दिल्ली पुलिस के जवान इकट्ठा हुए हैं. जवान अपने हाथ में काली पट्टी बांधकर पहुंचे हैं और वकीलों के खिलाफ प्रदर्शन किया.

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प्रदर्शन करने वाले जवानों ने कहा

वकीलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पुलिस के जवानों का कहना है कि हमारे साथ ज्यादती हो रही है, वो ठीक नहीं है. जवानों ने कहा कि हम शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करेंगे और कमिश्नर से अपनी बात रखेंगे.

पुलिस का कहना है कि हम सिर्फ ये बताना चाहते हैं कि पुलिसवालों के साथ भी सही तरह से व्यवहार होना चाहिए और कानून के अनुसार  समान रूप से सजा मिलनी चाहिए. साथ ही प्रदर्शन कर रहे एक जवान ने कहा कि वकील पिछले तीन दिनों से लगातार पुलिस और आम लोगों के खिलाफ गलत बर्ताव कर रहे हैं और सीनियर कुछ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं.

उनका कहना है कि हम भी वर्दी के पीछे एक इंसान हैं, हमारा भी परिवार है. हमारी पीड़ा कोई क्यों नहीं समझता, वहीं पुलिसवालों का सवाल है कि मानवाधिकार हमारे लिए नहीं है क्या. हमें कोई भी मारता-पीटता रहे और हम शांत रहें. हमें इंसाफ चाहिए और अगर पुलिस कमिश्नर हमारी बात नहीं सुनते तो हम गृहमंत्रालय तक जाएंगे. वहां तक शांतिपूर्ण मार्च करेंगे.

बतादें कि दिल्ली में हुई इस घटना के बाद और जगहों पर भी ऐसे मामले देखने को मिले थे. दिल्ली की ही साकेत कोर्ट, कड़कड़डूमा कोर्ट के बाहर भी पुलिस-वकील आमने-सामने आए थे. साथ ही उत्तर प्रदेश के कानपुर में भी वकीलों ने पुलिस के जवान को पीट दिया था.

तीस हजारी कोर्ट में हुई थी भिड़ंत

दरअसल,  शनिवार को तीस हजारी कोर्ट में पुलिस और वकील भिड़ गए थे. दोनों के बीच मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी. जिसके बाद वकीलों ने पुलिस जीप समेत कई वाहनों को आग लगा दी थी और तोड़फोड़ की थी.

बता दें कि तीस हजारी कोर्ट के लॉकअप में जब एक वकील को पुलिस जवानों ने अंदर जाने से रोका था. उसी के बाद कहासुनी बढ़ गई थी और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे. तभी से ये मामला शांत नहीं हो रहा है.

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Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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