Gathered Political

महाराष्ट्र में लगा राष्ट्रपति शासन,रामनाथ कोविंद ने दी मंजूरी,नए सिरे से सियासत शुरू

राष्ट्रपति
राष्ट्रपति

महाराष्ट्र में आखिरकार 19 दिन के बाद राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है. वहीं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश को मंजूरी दे दी है. बतादें कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यिारी ने राज्य की मौजूदा हालत की रिपोर्ट केंद्र को भेजी थी. रिपोर्ट में उन्होंने कहा था कि संविधान के मुताबिक राज्य में सरकार नहीं बन सकती है. उन्होंने रिपोर्ट में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की थी. जिसके बाद नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने राज्यपाल के इस सिफारिश को हरी झंडी दे दी थी. उसके बाद गृह मंत्रालय ने इस फाइल को राष्ट्रपति के पास भेज दिया था. राष्ट्रपति ने राज्य में संविधान की धारा-356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया है.

बता दें कि 9 नवंबर, शनिवार को पिछले विधानसभा की मियाद खत्‍म हुई थी. 24 अक्‍टूबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नतीजे के 19 दिन बाद भी अभी तक कोई दल बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े को राज्‍यपाल के सामने पेश नहीं कर पाया था.

राज्यपाल ने मौजूदा राजनीतिक संकट को देखते हुए राष्ट्रपति से संविधान की धारा 356 के तहत राष्ट्रपति शासन राष्ट्रपति शासन  लागू करने की सिफ़ारिश की थी. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी  खुद अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से इस बात का ऐलान किया था. इससे पहले राज्‍यपाल ने NCP को आज शाम साढ़े आठ बजे तक समर्थन जुटाने का वक्‍त दिया था. उधर शिवसेना ने राष्‍ट्रपति शासन को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे 24 अक्‍तूबर को आए थे. जिसमें 288 सदस्यीय सदन में बीजेपी 105 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि 56 विधायकों के साथ शिवसेना दूसरी बड़ी पार्टी और एनसीपी  54 विधायकों के साथ राज्‍य में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी रही. कांग्रेस के पास 44 सीटें हैं. 50-50 फॉर्मुले को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच विवाद बढ़ता गया और दोनों के बीच 30 सालों पुराना साथ टूट गया. उसके बाद बीजेपी ने सरकार बनाने से मना कर दिया, जिसके बाद राज्यपाल ने शिवसेना को न्‍योता दिया और 24 घंटे का वक्त दिया.जिसके बाद शिवसेना राज्‍यपाल के सामने अपना दावा पेश नहीं कर पाई, नतीजा हुआ कि राज्‍यपाल ने राज्‍य की तीसरी बड़ी पार्टी एनसीपी को न्‍योता दिया. लेकिन आखिरी समय तक कांग्रेस के समर्थन को लेकर असमंजस में बने रहने के कारण सियासी गतिरोध बना रहा.

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

Follow

Advertisement

Log in

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy