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शहीद विक्रमजीत की ऐसी कहानी जो आपकी आंखें कर देगी नम, देश की रक्षा करते हुए दे दी जान

देश की रक्षा में आए दिन हमारे जवान शहीद हो रहे हैं. उनके पीछे उनकी ऐसी कहानी रह जाती है जो आंखों को नम कर देती है. आज हम आपको एक ऐसे ही जवान की कहानी बता रहे हैं जिनकी शहादत से 6 महीने पहले शादी हुई थी, तीन महीने बाद पिता बनने वाला था, पर अनहोनी घट गई और वो बच्चे का चेहरा देखे बिना देश के लिए शहीद हो गया.

जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में आतंकियों से लोहा लेते हुए अंबाला के सपूत ने शहादत दी थी. अंबाला से सटे तेपला निवासी भारतीय सेना के जवान 26 साल के विक्रमजीत सिंह 2018 में दुश्मनों से बब्बर शेर की तरह लड़े और सीने पर गोलियां खाते हुए देश के लिए कर्बान हो गए. उनकी 6 महीने पहले शादी हुई थी और पत्नी भी गर्भवती थी.बलजिंद्र सिंह बेटे के बचपन को याद करते हुए कहते हैं, पढ़ाई के दौरान ही विक्रमजीत जिद करता था कि दादा की तरह मैं भी सेना में जाऊंगा. विक्रमजीत के दादा भी सेना में थे. वे पैराकमांडो से रिटायर हुए थे. देश सेवा इस परिवार को विरासत में मिली है.

विक्रमजीत सिंह साल 2013 में सेना में भर्ती हुए थे. पहली पोस्टिंग उन्हें फिरोजपुर में मिली थी. करीब डेढ़ साल बाद उनका तबादला जम्मू-कश्मीर में हो गया. इसी साल के शुरू में 15 जनवरी को यमुनानगर जिले के पामनीपुर गांव की हरप्रीत कौर से उनकी शादी हुई थी. छुट्टियां खत्म होने के बाद 24 मार्च को वे अपनी ड्यूटी पर लौट गए.

विक्रमजीत सिंह के दोस्त बताते हैं कि वो बेहद बहादुर था. देश के लिए प्राण न्योछावर करके उन्होंने दिखा दिया कि देश की रक्षा उनके लिए सर्वोपरि थी. सेना में भर्ती होने का जज्बा इतना था कि छोटी सी उम्र में ही उन्होंने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी थी.

देश की रक्षा के लिए शहादत देने का तेपला गांव के बेटों का जुनून पुराना है. जम्मू-कश्मीर ही नहीं अरूणाचल प्रदेश में भी इस गांव के बेटे अपनी मातृभूमि को बचाने के लिए अपनी जान की कुर्बानी दे चुके हैं. गांव के एक बेटे ने 1999 में कारगिल युद्ध, दूसरे ने राजौरी, तीसरे अरूणाचल प्रदेश और अब विक्रमजीत ने श्रीनगर में आतंकियों से लोहा लेते हुए देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए. गांव के करीब 300 युवा सेना में हैं. गांव में युवाओं में सेना में जाकर देश की सेवा करने का जुनून है.

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Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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