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सर्वे में हुआ खुलासा न मुंबई न दिल्ली, इस शहर के युवा कम उम्र में खो रहे हैं वर्जिनिटी

वर्जिनिटी
वर्जिनिटी

आपने देखा होगा कि भारत में सेक्स एक ऐसा मुद्दा है जिस पर भारतीय लोग अब तक खुल कर बात नहीं करते है. अगर करते थे भी तो बहुत झिझक और संकोच के साथ. लेकिन वक्त अब बदल गया है. सेक्स के मामले में अब भारतीय खुल कर अपनी राय रखने लगे हैं.वे खुलकर सेक्स के बार में बात भी करने लगे हैं.

सर्वे में खुलासा

एक सर्वे के मुताबिक 2019 में कई भारतीयों ने सेक्स और वर्जिनिटी को लेकर खुल कर बात की है. सर्वे में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि देश के कई शहर सेक्स के मामले में तेजी से आगे निकल गए हैं, क्योंकि यहां पहली बार सेक्स अनुभव लेने वालों की औसत उम्र घट गई है.

आपको सुनकर हैरानी होगी कि सबसे जल्दी वर्जिनिटी खोने वाले लोगों में गुवाहाटी शहर सबसे आगे है. यहां पर 61 प्रतिशत लोगों का कहना था कि उन्हें सेक्स का पहला अनुभव बहुत ही कम उम्र में हो गया था. ये देश के उन सभी शहरों में सबसे आगे रहा जहां सर्वे हुए है. जबकि देश भर में 33 प्रतिशत लोगों का दावा है कि उन्हें पहला यौन अनुभव किशोरावस्था में हुआ था.

2003 का सर्वे कुछ और था

वहीं दूसरी ओर 2003 में किए गए सर्वे में सिर्फ 8 प्रतिशत लोगों ने ये माना था कि उनका पहला सेक्स अनुभव 18 साल से पहले हुआ था. कहीं न कहीं इन बढ़ते आंकड़ों के पीछे इंटरनेट और मोबाइल भी एक वजह हो सकती है. क्योंकि आज सेक्स से जुड़ी इंसान की ऐसी कोई फैंटसी नहीं है जो इंटरनेट पर उपलब्ध न हो.इसलिए इन आंकड़ों में इन कारणों से भी बढ़ोतरी हुई है. इंटरनेट ने लोगों की झिझक को तोड़ा है. शहर हो या गांव सेक्स के मामले में सभी का रोमांच बढ़ा है. सर्वे से ये साफ होता है कि लोग अपनी सेक्स भावना को लेकर कहीं न कहीं पहले से खुल गए हैं.

सर्वे में पूछे गए ये सवाल

सर्वे में बदलते नजरिए पर सवालों के अलावा, सर्वेक्षण में कई नए सवाल भी लोगों से पूछे. लोगों से सेक्स को लेकर उनकी फैंटसी, वफादारी, पोर्नोग्राफी और सेक्स क्षमता बढ़ाने वाली वियाग्रा जैसी दवाओं के उपयोग के बारे में पूछा गया, पहले के मुकाबले लोगों ने इस बार खुलकर अपना नजरिया रखा.

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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