Culture Observed

कैसे तमिलनाडु बन गया जापानियों का दिल और भाने लगी दक्षिण भारत की संस्कृति

दक्षिण भारत का सबसे खूबसूरत राज्यों में से एक तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई है. इस राज्य में पर्यटक संस्कृति, धर्म, सहजता और सुंदरत को देख सकते हैं. इस खूबसूरत राज्य में  समुद्र से लेकर खूबसूरत नजारों वाले हिल-स्टेशन मौजूद हैं. अद्भुत वास्तुकला से परिपूर्ण मंदिर और वन्य जीव पार्क देख सकते हैं. इसी कारण पिछले दो दशकों में जापानी प्रवासियों को यहां आना रहना पंसद आ रहा है, परिदृश्य और संस्कृति को धीरे-2 रंग दिया है.

भारत में सबसे बड़ा जापानी समुदाय इस शहर में रहता है. चेन्नई में 50 से ज्यादा जापानी और कोरियाई रेस्तरां हैं, जिनमें से सभी की लोकप्रियता अधिक है. वहीं सबसे पुराने जापानी रेस्तरां डाहलिया को ले लीजिए. उसी रेस्तरां की सफलता की वजह से और जापानी कंपनियों ने शहर में और रेस्तरां खोलें. साथ ही और भी निवेश बढ़ाने की भी योजना बना रही है, ताकि और भी रेस्तरां खोले जा सकें.

बतादें कि साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) के मुताबिक, 1990 के दशक से दोनों देशों के संबंध का पता लगाया जा सकता है, जब भारत ने पहली बार वैश्विक कंपनियों के लिए अपना बाजार खोला था. तभी मित्सुबिशी मोटर्स, मारुति सुजुकी और टोयोटा मोटर कॉरपोरेशन जैसी जापानी फर्मों को भारत में खुद को स्थापित करने की जल्दी थी. ये खासतौर पर तमिलनाडु के लिए लागू होता है, जो विश्व में टॉप 10 कार मैन्युफैक्चरिंग में से एक है.

पूरे भारत में जहां  1000 जापानियों के व्यापार है, उसमें से 5वां भाग दक्षिण भारत के तमिलनाडु में है. ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है क्योंकि, चेन्नई देश का दूसरा बड़ा बंदरगाह है. यहां से जापानी निवेशकों को काफी फायदा भी है. वहीं जापान तमिलनाडु में तीन औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना बना रहा है. फिलहाल जापानी फर्म इन योजनाओं पर काम कर रही है. दर्जनों कंपनियां खुद को इस क्षेत्र में स्थापित करना चाहती है.

जापानी विशेषज्ञ केसवन ने SCMP को बताया कि तमिलनाडु में ज़बरदस्त लोगों का समूह है, जो और राज्यों के मुकाबले जापान में आता है.

कुछ हद तक जापान ने भी, दक्षिण भारत के प्रभाव को महसूस किया है. यहां कि कुछ फिल्मों का जापान में इतना क्रेज हो गया कि वे पूरे साल सिनेमा घरों में चलीं. लोगों ने उसे खूब पसंद भी किया. फिल्म स्टार रजनीकांत की फिल्में जापान के मूवी हॉल में दिखाई जाती है.

दोनों देशों के बीच ये दोस्ती का अच्छा संकेत है. एक सांस्कृति का गहरा आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच देखने को मिल रहा है.

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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