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तुंगनाथ की चढ़ाई आपको थका देगी, लेकिन आपकी दृष्टि- सृष्टि का पूरा आनंद लेगी

तुंगनाथ
तुंगनाथ

एक बार फिर हम आप से पूछते हैं कि क्या आप कभी तुंगनाथ गए हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि जब मैं ने केदारनाथ पर आर्टिकल लिखा था, तब उसकी शुरुआत भी कुछ ऐसे ही की थी. ये समझ लीजिए कि ये आर्टिकल भी कुछ केदारनाथ जैसा ही है. जैसे कि आप जानते है, एक फिल्म आती है, फिर उसका दूसरा पार्ट आता है. इस आर्टिकल में हम आपको तुंगनाथ की चढ़ाई के बारे में बताएंगे. कहीं न कहीं इस आर्टिकल में केदारनाथ का जिक्र होगा, वो इसलिए कि ये दूसरा पार्ट है और जानकार कहते हैं कि हर फिल्म हर चीज का दूसरा पार्ट कभी अच्छा नहीं होता. अगर बात की जाए तुंगनाथ की तो बहुत ही जाना-माना मंदिर है. तुंगनाथ, पंच केदार (केदारनाथ, मद्महेश्वर, तुंगनाथ, रूद्रनाथ और कल्पेश्वर) में से एक है और ये केदारों में तीसरे स्थान पर आता है. आप सभी सिर्फ केदारनाथ के बारे में ही जानते होंगे, लेकिन ये पांचों केदार भी उतना ही महत्व रखते हैं, जितना केदारनाथ.

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तुंगनाथ की चढ़ाई

इस आर्टिकल में हम आपको तुंगनाथ की चढ़ाई के बारे में बताने वाले है. प्रकृति के नजारों से आपकी आत्मा प्रसन्न हो जाएगी. वैसे तो घोड़ा-खच्चर सब जाता है,  लेकिन पैदल यात्रा करने का अलग ही मजा है. क्योंकि केदारनाथ की तरह तुंगनाथ की चढ़ाई ज्यादा लंबी नहीं है. चोपता से तुंगनाथ मंदिर के बीच सिर्फ 3 किलोमीटर की पैदल यात्रा पड़ती है. जो आपकी यात्रा को यादगार बनाती है. यात्रा के दौरान सुविधा में कोई कमी नहीं है, शौचालय, चाय-पानी का बंदोबस्त काफी अच्छा किया गया है.

प्रकृति का सौंदर्य

पेडों और पहाड़ों से गुजरता हुआ रास्ता आपको आगे कि ओर ले जाता रहेगा और यात्रा में आनन्द आता रहेगा. लेकिन आधे रास्ते की चढ़ाई चढ़ने के बाद आपको थकान महसूस नहीं होगी, क्योंकि आधी चढ़ाई चढ़ने के बाद आपको कोई पेड़ नजर नहीं आएगा. दूर- दूर तक केवल घास के मैदान ही देखने को मिलेंगे. ये घास के मैदान आपको ऐसे लगेंगे जैसे कि घास की चादर आपके स्वागत के लिए बिछाई गई हो. सबसे बड़ी बात इन खूबसूरत घास के मैदानों को देखते ही आपकी थकान अपने आप गायब हो जाएगी. आप अपने आपको एक अलग ही दुनिया में पहुंचा हुआ महसूस करेंगे. आपको लगेगा धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है तो वो बस यहीं है. आप आसमान की तरफ देखेंगे तो ऐसा लगेगा कि बादलो ने चारों ओर अपना साम्राज्य फैलाया हुआ है.

चढ़ाई खत्म होने को आई

सुंदर नजारों को देखते-देखते आप तुंगनाथ की चढ़ाई पूरी कर लेंगे. जब  मंदिर 1 किलोमीटर रह जाएगा, तो वहां एक दुकान आएगी. कुछ ही दूरी पर एक गणेश जी का मंदिर बना हुआ है. उसी के पास में रावण शिला है, जहां पर रावण ने तपस्या की थी और भोले बाबा को प्रसन्न किया था. उससे तकरीबन 1.5 किलोमीटर ऊपर चंद्रशिला चोटी है, जहां से 360°  का पैनोरामा व्यू दिखता है. चोखम्भा पर्वत तो मानो ऐसा प्रतीत होता है कि वो आपके साथ है. क्योंकि वो पूरे रास्ते आपके साथ बना रहता है,  मतलब ये कि बादल ना हो तो ये दिखता रहता है.

मंदिर पहुंच गए आप

आप मंदिर पहुंच चुके हैं….मन्दिर में दो कक्ष बने है एक बाहरी कक्ष और दूसरा मुख्य कक्ष जहां पर साक्षात भगवान शिव का वास है. एक तरफ यात्री प्रकृति को आंखों में बसा कर अद्भुत नजारों से गुजरता हुआ जैसे ही मंदिर तक पहुंचता है, तो वो तनाव मुक्त होकर हृदय में शांति महसूस करता है. इस मंदिर में भगवान शिव के हृदय और बाहों की पूजा होती है.

तुंगनाथ की कहानी

दरअसल ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान शिव एक बैल के रूप में अंतर्धयान हुए तो उनके धड़ से ऊपर का भाग काठमांडू में प्रकट हुआ और अब वहां पशुपतिनाथ का मंदिर है. वहीं शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मदमदेर में और जटा कल्पेर में प्रकट हुई इसलिए इन चारों स्थानों सहित केदारनाथ को पंचकेदार कहा जाता है.

महादेव सामने बाहें खोले खड़े हैं

जैसे ही श्रद्धालु भगवान शिव के पास पहुंचता है, तो उसे लगता है कि परमात्मा भी अपने भक्त का बाहें खोलकर हृदय से स्वागत कर रहे हैं. मंदिर की शांति इंसान को शिवमय कर देती है. उसके आंखों में सिर्फ परमात्मा को बसाने की चाहत होती है. भक्त महादेव के पास बैठकर कह रहा होता है, संसार में जो भी सबसे सुंदर है वो शिव है, क्योंकि ये दुनिया शिव की, ये प्रकृति शिव की, ये नजारा शिव का, ये सृष्टि शिव की, ये दृष्टि शिव की, ये रचना शिव की, ये भक्ति शिव की,ये शक्ति शिव की, जो भी कुछ अद्भुत अविश्वसनीय है, वो शिव है.

इसी के साथ यात्रा समाप्त हुई. मैं आपको यहीं छोड़े जा रहा हूं, महादेव के पास नीचे नहीं उतार रहा. क्योंकि बस इतना सा ख्वाब है…प्रकृति की गोद में बस जाने को दिल चाहता है.

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को पनपने का मौका देता हूं..

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