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पैन कार्ड बनवाने का झंझट खत्म, 10 मिनट में हाथों-हाथ मिलेगा पैन, वो भी फ्री

New PAN Card Rules To Come Into Effect From December 5.

ये खबर आपके लिए बहुत खास है. क्योंकि अब कहीं जाए बिना पैन कार्ड मिल जाएगा, आपको लाइनों में धक्के नहीं खाने पड़ेंगे.बतादें कि आयकर विभाग इन दिनों रियल टाइम बेसिस पर ई-पैन जारी करने के लिए एक प्रोसेसिंग सेंटर पर काम कर रहा है. जिसका काफी लाभ होगा क्योंकि अब उन्हें सिर्फ 10 मिनट में आधार बेस्ड ई-केवाईसी के जरिए ई-पैन मिल जाएगा. इससे लोगों का काफी वक्त बचेगा.

10 मिनट में मुफ्त पैन मिलेगा

– पैन कार्ड के लिए अब आपको न ही इंतजार करना पड़ेगा, न ही लाइनों में खड़ा होना पड़ेगा

– अब आपको अप्लाई करने के साथ ही पैन मिलेगा

– आपको मिलेगी ऑनलाइन पैन की सुविधा

– इसके लिए कोई भी दस्तावेज नहीं लगेगा

– सिर्फ देना होगा आधार नंबर

– आधार नंबर देने पर तुरंत ओटीपी मिलेगा

– OTP वेरिफिकेशन के साथ ही ई-पैन मिल जाएगा

– ई-पैन के लिए किसी तरह का कोई चार्ज नहीं लगेगा

– ई-पैन कार्ड में QR कोड होगा

– QR कोड स्कैन करने पर पूरी डिटेल मिल जाएगी

–  ई-पैन का प्रिंट भी निकाला जा सकेगा

जानकारी के अनुसार कुछ हफ्तों में सेवा शुरु होगी. इसके लिए वित्त मंत्रालय पहल कर रहा है.

वित्त राज्य मंत्री का बयान

आपको याद हो तो वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने जुलाई महीने में इस बात की घोषणा लोकसभा में की थी, तब वित्त राज्य मंत्री ने कहा था कि ‘सरकार रियल टाइम पैन /टैन प्रोसेसिंग सेंटर (RTPC) बनाने पर विचार कर रही है.

62 हजार ई-पैन

इनकम टैक्ट डिपार्टमेंट ने पायलट प्रोजक्ट के तौर पर पिछले 8 दिनों में 62हजार से ज्यादा ई-पैन जारी किए गए हैं. अब इसे पूरे देश में लागू करने की तैयारी है.

टैन और पैन ?

ये खास सुविधा खासतौर से उन लोगों के लिए लाई जा रही है, जिन्होंने आधार बेस्ड ई-केवाईसी के जरिए अप्लाई किया है. टैन 10 संख्या का अल्फान्यूमेरिक नंबर होता है. इसकी जरूरत करदाताओं को टैक्स का भुगतान करते वक्त पड़ती है.

वहीं दूसरी ओर पैन कार्ड को स्थायी खाता संख्या कहा जाता है, जो आर्थिक लेनदेन के लिए बहुत जरुरी होता है. इसमें भी 10 अंक होते हैं, जिनको आयकर विभाग की ओर से निर्धारित किया जाता है.

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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