Gathered Humour

ऑफिस में 14 अगस्त को जब पहननें हो एथनिक वियर तो क्या सोचते हैं आप

15 aug
Source: File pic

भारत इस बार 73वां स्वतंत्रता दिवस बड़ी धुमधाम से मनाने जा रहा है. हर तरफ तिरंगा लहराएगा. पूरा देश आजादी की खुशियां मनाएगा. मनाए भी क्यों न क्योंकि 15 अगस्त के दिन ही हमें आजादी मिली थी. अंग्रेजों ने हम पर 200 साल तक राज किया. हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान ने हमें आजाद करवाया.वलवहीं अगर 13 अगस्त की शाम को ऑफिस में आपसे कहा जाए कि 14 अगस्त को सभी लोगों ने एथनिक वियर पहनने हैं. उससे सुनते ही आपको लगेगा, कि धरती पर जादू एक बार फिर आगया. क्योंकि उसे पहनना किसी टास्क से कम नहीं होता. ऑफिस से घर जाते वक्त आप पूरे रास्ते यही सोचते हुए जाओगे कि कल क्या पहनें यार टेंशन होगई. अगर आपके पास एथनिक वियर है, तो ठीक है. अगर नहीं है तो, आप अपने दोस्तों से उसका बंदोबस्त जरूर करेंगे. अगर ज्यादा है, तो फिर भी कंफ्यूजन. इसी सोच को सोचते हुए ज्यादातर लोग रात को सो नहीं पाएंगे कि वो ऑफिस में कल कैसे लगेंगे.

15 aug
Source: file pic

फिर आती है 14 अगस्त की सुबह जिसने आपको पूरी रात बैचेन किया. कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो सोकर लेट उठे होंगे. कुछ लोग ऑफिस से पहले जिम भी गए होंगे. कुछ ये सोच कर रात को सोए होंगे कि सुबह उठकर कपड़े कपड़े प्रेस करवा लेंगे. कहीं न कहीं जल्दबाजी में आप सुबह फिर एक बार कंफ्यूज हो जाते हैं कि मैं कैसा लग रहा हूं या लग रही हूं. लेकिन इन चीजों से बचते हुए आप ऑफिस के लिए निकल जाते हो.

15 aug
Source: File Pic

मेट्रो, बस ऑटो, कार में ऑफिस जाते वक्त आप रास्ते में लोगों को देखते हो कि मेरे जैसे कितने लोग है, एचआर का कहना मान कर एथनिक वियर पहनकर ऑफिस जा रहे है. कहीं न कहीं आपको अंदर एक एहसास होता है कि कहीं मैं सबसे अलग तो नहीं लग रहा. सब मुझे ऐसे क्यों देख रहे हैं. शायद आप नहीं जानते कि सभी लोग आप को देखकर यही सोच रहे होते हैं कि आप अच्छे लग रहे हैं.  इन सबको सोचते हुए, आप ऑफिस में जैसे ही पहुंचते है. सभी लोग आपको देखते ही कहते हैं कि आप अच्छे लग रहे हो. इसी बीच उन लोगों की भी आवाज आती है. जो एथनिक वियर नहीं पहन कर आए होते. तो आपको ये सब सुनकर ऐसा लगता है, जैसे आप गंगा जी नहा आए.

15 aug
Source: File Pic

तो दोस्तों कुछ भी हो जाए हमें अपने हर पर्व को खुशियों के साथ और सभी के साथ मिलजुल कर मनाना चाहिए.

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

Follow

Advertisement

Log in

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy