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जानिए कौन हैं जस्टिस बोबडे जो बन सकते हैं मुख्य न्यायाधीश,CJI रंजन गोगोई ने की सिफारिश

एस.ए बोबडे
एस.ए बोबडे

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई अगले महीने की 17 तारीख को रिटायर हो रहे हैं. इसी के चलते सुप्रीम कोर्ट में अगले चीफ जस्टिस नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है. ऐसे में अब CJI रंजन गोगोई ने केंद्र सरकार को अगले CJI  एस.ए बोबडे का नाम सुझाया है. ऐसे में संभावना है कि वे देश के अगले मुख्य न्यायाधीश होंगे. बता दें कि देश के 46वें  CJI के तौर पर रंजन गोगोई ने 3 अक्टूबर 2018 को शपथ ग्रहण की थी. वहीं जस्टिस बोबडे इस समय रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई कर रही पीठ का हिस्सा हैं,  इसके अलावा वे कई बड़े फैसलों में शामिल रहे हैं. आइए आज आपको जस्टिस बोबडे से जुड़ी कुछ बातें बताते हैं.

– जस्टिस अरविंद शरद बोबडे (एस. ए. बोबडे)  का जन्म जन्म 24 अप्रैल, 1956 को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था.

–    नागपुर यूनिवर्सिटी से उन्होंने बी.ए. और एल.एल.बी डिग्री ली है.

–    जस्टिस बोबडे ने 1978 में बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र को ज्वाइन किया था.

–    फिर उन्होंने बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में लॉ की प्रैक्टिस की, 1998 में वरिष्ठ वकील बने.

–   साल 2000 में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में बतौर एडिशनल जज बने. इसके बाद वे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने.

–    सुप्रीम कोर्ट में 2013 बतौर जज कमान संभाली. जस्टिस एस. ए. बोबड़े 23 अप्रैल, 2021 को रिटायर होंगे.

–    वहीं ऐसा कहा जा रहा है कि 18 नवंबर को जस्टिस बोबडे बतौर चीफ जस्टिस शपथ ले सकते हैं.

किन फैसलों के लिए जाने जाते हैं जस्टिस एस.ए बोबडे

–  सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आधार कार्ड को लेकर दिए गए फैसले में जस्टिस एस. एस. बोबडे भी शामिल थे. SC ने कहा था कि आधार कार्ड के बिना कोई भी भारतीय मूल सुविधाओं से वंचित नहीं रह सकता है. इस पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस चेलमेश्वर और जस्टिस नागप्पन शामिल थे.

– जब CJI रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था, तब उसकी जांच SC के ही 3 जज कर रहे थे, उस पीठ में जस्टिस एस.ए बोबडे शामिल थे.

– दिल्ली- NCR में जब SC ने पटाखों की बिक्री पर जब रोक लगाई थी, इस फैसले में जस्टिस एस.ए बोबडे भी शामिल थे.

– 40 दिनों से रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की रोजाना सुनवाई कर रही जजों की पीठ में जस्टिस एस.एस बोबडे शामिल थे.

About the author

Tarun Phore

न मैं आस्तिक... न मैं नास्तिक...बातें करूं मैं Sarcastic...अपनी अलग दुनिया में मस्त... सवाल पूछना अच्छा लगता है, इसलिए नहीं पत्रकार हूं...इसलिए क्योंकि सवाल तुम्हें भेड़चाल से अलग बनाते है...तभी मैं हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से तर्क रखता हूं...बाकि जजमेंटल बिल्कुल नहीं हूं...सोच को दबाता नहीं बल्कि उठाता हूं.

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